About Me

भोपाल, मध्‍यप्रदेश, India
लेखक कला के क्षेत्र में सबसे पहले फिल्‍म टंट्या भील में कार्य किया जिसमें होल्‍कर पुलिस का रोल निभाया, इसके बाद फिल्‍म चक्रब्‍यूह में कार्य किया जिसमें ब्‍यूरोकेट का रोल निभाया एवं फिल्‍म सत्‍याग्रह में अनसनकारी का रोल किया जिसमें अमिताभ बच्‍चन के साथ अनसन पर बैठकर रोल किया।

Saturday, 5 April 2014

एक पिता का ईश्वर से अनुनय, बेटी को केंसर है लास्ट स्टेज पर है


भगवान् क्यों
क्यों मेरी बेटी के साथ इतना बड़ा खेल खेल रहे हो,
आखिर क्या गुनाह किया है उसने जो उसे इतनी बड़ी सजा दे रहे हो,
हर रोज तुम्हारी पूजा करती है
क्या यह गुनाह है
सारी दुनियां आपके आगे झुकती है
तो आपको क्या फर्क पड़ता है उसमे से एक कम हो गया तो,
आप तो सारे संसार के पिता हैं
पर मैं क्या करूँ मेरी तो एक ही बेटी है ना
सारे संसार के पिता हो
कभी एक बेटी के पिता बनकर देखो कितनी तकलीफ होती है
तीन साल की थी मेरी पायल तब तुमने उससे उसकी माँ को छीन लिया
तब मैं खामोश रहा
रात रात भर इन्हीं हाथों का झूला बनाकर, लोरी गाकर उसे सुलाया है,



मत करो भगवान् ऐसा मत करो
यदि जान ही लेनी है तो मेरी ले लो
मगर कोई भी बेटी का बाप अपनी बच्ची को मरते हुए नहीं देख सकता,
भगवान, नहीं देख सकता

Sunday, 15 January 2012

फूट डालो और शासन करो नीति

फूट डालो और शासन करो नीति
अपनाई थी
अंग्रेजों ने
हमने भी कौन सा तीर मार लिया
वही नीति
अपनाते है।
बना कर गये जो कानून
वही कानून
चलाते हैं
उन कानून में बदला तो वही
पसर्नल लॉ
फूट डालो और शासन करो
जो हमें स्वतंत्रता की लडाई के समय याद आया था
कि हमें जाति-पांति को
त्यागकर
एक होना है।
भूल गये है हम
जाति, धर्म, भाषा, वर्ण
ये हथियार
बन गये हैं
नेताओं के
करते है वार आरक्षण का ,
बनाओ ढाल एकता की
न बना सके वेवकूफ
न बांट सके छोटे-छोटे समूहों मैं
बोट बैंक की तरह
न खुले हों जगह जगह
अलग अलग नाम के बैंक
बैंक एक हो अपना
खाते खोलना हमारे हाथ में होता है।
नहीं खोलें हम खाते उनके
जो चुनाव के समय आते हैं
हमारे घर पर
हम खोलते हैं उनका
खाता
तभी खुलता है उनका खाता
स्विस बैंक में।

दिनेश दुबे
9229547354