लेखक एक भारत का आम नागरिक है जिसने कई मंत्री के निजी स्टाफ में काम किया है तथा वर्तमान में भी मध्यप्रदेश के राज्यमंत्री के निजी स्टाफ में कार्यरत है।
About Me
- Dinesh Kumar Dubey
- भोपाल, मध्यप्रदेश, India
- लेखक कला के क्षेत्र में सबसे पहले फिल्म टंट्या भील में कार्य किया जिसमें होल्कर पुलिस का रोल निभाया, इसके बाद फिल्म चक्रब्यूह में कार्य किया जिसमें ब्यूरोकेट का रोल निभाया एवं फिल्म सत्याग्रह में अनसनकारी का रोल किया जिसमें अमिताभ बच्चन के साथ अनसन पर बैठकर रोल किया।
Friday, 5 May 2017
पैतरे पर पैतरे
Thursday, 27 April 2017
High Court Order
प्रतिलिपि, नियमों के अनुसार
(सुबोध अभयनकर)
न्यायाधीश
Tuesday, 11 April 2017
आरक्षण
आज हम उस गलती की सजा काट रहे हैं जो हमने की ही नहीं । जिसका कारण है आरक्षण व्यवस्था। और ये नेताओं के निजी लाभ के लिए बनाई गई व्यवस्था है। आज हमारा योग्य युवा विदेशों में जा रहा है। और अयोग्य शासकीय नोकरी में।
नोकरी में आरक्षण , पदोन्नति में आरक्षण।
आरक्षण के द्वारा हिंदुओं को ही विभाजित किया जा रहा है फिर उनसे एक होकर रहने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं।
पहले समान नागरिक अचार संहिता की बात की जाए फिर राम मंदिर की बात की जाए और उसके बाद तीन तलाक की बात की जाए।
क्योंकि आजादी के बाद आरक्षण पाए लोग रिटायर हो चुके हैं 60 साल हो चुके हैं अब आरक्षण की जरूरत नहीं है। 60 साल हमने भी वही दुख झेला है ।
अब हमारे बच्चों की क्या गलती है?
Friday, 3 March 2017
दैनिक वेतन भोगी या बनिये के नोकर
मध्यप्रदेश शासन जबकि दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों एवं गैंगमेनों को स्थाई कर्मी में विनियमितीकरण करने के स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है एवं संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी ने भी उक्त आदेश को संलग्न कर अपना कवरिंग लेटर लगाकर समस्त जिलाें के उप/सहायक संचालक एवं प्रमुख उद्यानों के सहायक संचालक को स्पष्ट निर्देश दिये हैं कि शासन के आदेश पर नियमानुसार कार्यवाही करें फिर भी सहायक संचालक उद्यान प्रमुख उद्यान के प्रभारी कोई कार्यवाही करने से पहले संचालक से कनिष्ठ अधिकारियेां से पूछ रहे हैं कि कैसे क्या करना है।
30 वर्ष विभाग की सेवा कर के जो दैनिक वेतन भोगी रिटायर्ड हो गये हैं उन्हें उपादान की राशि का भुगतान करने के शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बाद भी सहायक संचालक उद्यान प्रमुख उद्यान द्वारा उपादान राशि का भुगतान करने में कोर्ट के आदेश को भी मानने को तैयार नहीं हैं। कोर्ट ने 7 रिटायर्ड दैनिक वेतन भाेगी कर्मचारियों को उपादान राशि लगभग 15.00 लाख का भुगतान करने के निर्देश दिये हैं। 120 दिन व्यतीत हो जाने के बाद भी न तो विभाग द्वारा अपील की गई न ही भुगतान किया गया।
अब एक नया बहाना बनाया जा रहा है कि भोपाल में प्रमुख उद्यान में तो दैनिक वेतन भोगी को रोज रखा एवं रोज निकाला जाता है अत: ये उपादान के हकदान नहीं हैं। मैं ये पूछना चाहता हूं कि जब रोज रखा जाता एवं रोज निकाला जाता है तो इन दैनिक वेतन भोगी को लगभग 30 वर्ष सेवा काल में एक भी बार क्यों नहीं निकाला गया। अब जब वे उपादान राशि की मांग कर रहे हैं तो ये बहाना क्यों बनाया जा रहा है कि रोज रखते और रोज निकालते हैं। लगभग 400 दैनिक वेतनभोगी पिछले 40 साल से लगातार क्यों काम कर रहे हैं. जब इतने आदमी की लगातार आवश्यकता रहती है तो शासन के इसकी मंजूरी क्यों नहीं ली गई। क्या इनके बिना मुख्यमंत्री निवास उद्यान, राजभवन उद्यान, एवं भोपाल की 6 नर्सरी एवं आई ए एस के घरों पर स्थित उद्यानों का रखरखाव संभव है।
विभाग में संचालक पद पर पिछले कई वर्ष से कोई आई ए एस या आई एफ एस की पदस्थापना शाासन करता आया है जो कुछ समय के लिये आता है जब तक वो विभाग के बारे में समझता है तब तक उसे हटाकर किसी दूसरे काे बैठा दिया जाता है। विभागीय वरिष्ठ अधिकारी को संचालक के पद पर पदस्थ नहीं किया जाता है जिससे वे हतोत्साहित होकर विभाग के विरूद्ध निर्णय लेकर विभाग को डुबाने में लगे हैं। एवं संचालक की चापलूसी कर संचालक को भी सही स्थिति से अवगत नहीं कराकर उसे भी भृमित करते रहते हैं।
शासन स्तर से जो निर्देश जारी हो चुकेे हैं उन्हें समझने की कोशिस न करते हुऐ शासन को हीे बार बार पत्र लिखकर मत मांगा जाता है। शासन ने भी कई बार पत्र जारी कर विभागीय स्तर से कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं परन्तु विभाग के अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं बार बार शासन को परेशान करते हैं और कर्मचारी को उलझाते रहते हैं।
Monday, 6 February 2017
कृषि श्रमिक बनाम दैनिक वेतन भोगी
उद्यानिकी विभाग का नाम पहले उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी था जिसे बदलकर उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण कर दिया गया है। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि विभाग में कोई फसल कटाई का कार्य नहीं होता है अत: विभाग में कृषि श्रमिक का कोई काम नहीं होना चाहिए।
परन्तु अधिकारियों की मनमानी एवं तानाशाही के चलते वर्ष 1997 में तत्कालीन संचालक ने मजदूरी का खर्चा कम करने के उददेश्य से विभाग में वर्ष 1988 के बाद से कार्यरत दैनिक वेतन भोगी माली कर्मचारी को पहले तो नौकरी से निकाल दिया जब कार्य प्रभावित होने लगा तो उन्हें जो पूर्व में मासिक जिलाध्यक्ष की दर पर कार्यरत थे, साप्ताहिक कृषि श्रमिक की दर पर बापस रख लिया। बेचारे नौकरी जाने के डर से कम पैसे में कार्य करने को मजबूर हो गये। इन्हें सप्ताह में 6 दिन का वेतन देकर पूरे 7 दिन कार्य कराया जाता रहा अर्थात माह में इन्हें केवल 26 दिन की ही मजदूरी मिलती रही एवं कोई शासकीय अवकाश की पात्रता भी नहीं रखी। इन्हें कभी भी कार्य से बंद कर नये लोगों को भर्ती कर लिया जाता रहा।
अधिकारियों को वर्ष 1988 के बाद के मजदूरों को फिर से रखने के लिये इसलिये मजबूर होना पडा क्योंकि भोपाल में ये मजदूर श्रमिक माननीय मुख्यमंत्री निवास उद्यान, राजभवन उद्यान, समस्त मंत्री निवास उद्यानों एवं आईएएस और आईपीएस के साथ साथ विभागीय अधिकारियों के घरों में भी घर के बगीचे में साग-भाजी उगाने से लेकर उनके घर के झाडू-पौंछा और चौका-बरतन तक करते हैं।
Saturday, 28 January 2017
न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948
Saturday, 21 January 2017
पिताजी आप पिटे सो पिटे हम सब को क्यों पिटवाया
परिवार में पिता माता पुत्र पुत्री चार लोग थे।
उनके सामने एक गुंडा टाईप का आदमी बैठा था।
गुंडे ने उस परिवार की लडकी को छेड. दिया।
पिता ने गुंडे से कहा कि तुम अपने आप काे क्या समझते हो
मैं तुम्हें अगले स्टेशन पर देखता हूँ। पुलिस बुलाकर तुम्हें अंदर करवा दूंगा।
इतने में गुंडे ने पिताजी को एक थप्पड रशीद कर दिया।
फिर पिता बोला कि अच्छा तुम्हारी हिम्मत
तुमने मुझे थ्प्पड मारा
मुझे मारा सो मारा मेरी बीबी को मत मार देना
नहीं तो मैं बहूत बुरा आदमी हॅूं
अभी तुम मुझे जानते नहीं हो
इतने में गुंडे ने उसकी बीबी को भी एक थ्प्पड रशीद कर दिया
पिता बोला अच्छा तुम्हारी इतनी हिम्मत
पता नहीं तुम्हें मैं क्या समझकर छोड रहा हूं।
पर मैं तुम्हें अगले स्टेशन पर बताउंगा कि मैं क्या हूँ
तुम्हारी गुण्डई निकल जायेगी यदि तुमने मेरे बेटे काे मारा
फिर गुण्डे ने बेटे काे भी एक थ्प्पड मार दिया
फिर पिता बोला यदि तुमने मेरी बेटी को मार दिया तो मैं तुम्हारा
यहीं मडर कर दूंगा।
इस पर गुंडे ने उसकी बेटी को भी एक थप्पड जड दिया
इसके बाद वे सब शांत बैठ गये
गुंडा अगले स्टेशन पर उतर का चला गया
यह परिवार भी अपने घर पहुंचा
घर पर बेटे ने पिताजी से पूछा कि
आप तो पिटे सो पिटे
हम सब को क्यों पिटवाया
इस पर पिताजी ने जवाब दिया
यदि मैं तुम सब को नहीं पिटवाता तो तुम सब
घर पर आकर मुझे चिढाते कि
क्यों पिताजी कैसे पिटे
मजा आया;;;;
Tuesday, 10 January 2017
क्या उद्यान विभाग के दैनिक वेतन भाेेगी इन्सान नहींं हैं
Monday, 9 January 2017
शासन के आदेशों को नहीं मान रहा है उदद्यान विभाग
Monday, 10 October 2016
एक ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी पर एक माली भी नहीं
Sunday, 10 April 2016
चंदन राय
तुमने आबाज देदी तो आना पड़ा
क्योकि रिस्ता ही येसा तुमसे मेरा
जो नहीं चाह कर निभाना पड़ा
और फिर श्याम का रूप धरना पड़ा
शिव को देवत्व का त्याग करना पड़ा
प्रेम ही है कि जिसके लिये स्वर्ग से
देवताऔ को धरती पे आना पड़ा
पर ये निष्ठुर समय आजमाता रहा
सत्य को तो भटकना पड़ा है यहां
भूलिये नहीं कि ये है दुनियां जहां
इस तरह भी भरोसा दिलाना पड़ा
जानकी को धरा में समाना पड़ा
जिंदगी मैं कभी भी नहीं टूटता
साथ भी कोई येसा नहीं है कि जो
जिंदगी में कभी भी नहीं छूटता
मेरी खामोशियां यहां न किसी ने सुनी
शोर तब जाके मुझको मचाना पड़ा
Thursday, 31 March 2016
दैनिक वेतन भोगी की उच्च कुशल श्रेणी को भूल गया शासन
मध्य प्रदेश शासन ने दैनिक वेतन भोगी श्रमिक की एक श्रेणी बढ़ा कर चार श्रेणी कर दी हैं. पहले तीन श्रेणियां थी.
ये ४ श्रेणियां हैं
उच्च कुशल
कुशल
अर्धकुशल
अकुशल
शासन ने दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों को स्थाई कर्मी तो घोषित कर दिया पर केवल तीन पे ग्रेड रखे जो कुशल, अर्ध कुशल एवं अकुशल के लिये रखे हैं। उच्च कुशल के लिये भुला दिया। अरे याद करो आप ने ही नई श्रेणी उच्च कुशल बनाई थी। एक पे-बैंड और बना देते।
शासन से जितने दैनिक वेतन भोगी के भला करने के आदेश निकलते हैं. वे उद्यान विभाग के अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं परन्तू बुरा करने के यदि कोई आदेश निकले तो उनको तूरन्त लागू कर दिया जाता है.
उद्हारण दैनिक वेतन भोगी को ६२ साल में सेवा निवृत करने का जैसे ही शासन का आदेश आया तो विभाग ने उनका मेडीकल कराकर उन्हें फटा फट सेवा निवृत कर दिया.
अभी हाल में ही दैनिक वेतन भोगी की एक नई श्रेणी बनाई गई है "उच्च कुशल". इसके लागू करने की बात आई तो फिर वही आलाप कि हमारे यहां तो कोई दैनिक वेतन भोगी है ही नहीं.
विभाग के संचालक महोदय को भी ये ग्यान नहीं है कि शासन के सभी विभागों में श्रमायुक्त अथवा जिलाध्यक्ष द्वारा समय समय पर घोषित दरें दी जातीं हैं फिर चाहे वह श्रमिक हो या वह दैनिक वेतन भोगी की किसी भी श्रेणी में आता हो.
दैनिक वेतन भोगी की श्रेणियां कार्य आधारित हैं. कार्य की प्रकृति एवं कार्य निष्पादन में स्वयं की बुद्धि से कार्य किया जाता है या निर्देशन में कार्य किया जाता है. इस पर निर्भर हैं श्रेणियां.
दैनिक वेतन भोगी जिन्हें कलेक्टर रेट से मासिक वेतन मिलता था सन् १९९७ में उन्हें साप्ताहिक कृषि नियोजन की दर पर कर दिया गया. कृषि विभाग में कृषि नियोजन नहीं लागू है पर उद्यानिकी में कृषि नियोजन लगा रहा. लम्बी लड़ाई के बाद २०१२ में कृषि नियोजन समाप्त हूआ. और पुनः मासिक कमिस्नर रेट चालू हुआ.
भीख मांगने को मजबूर दैनिक वेतन भोगी
उद्यान विभाग में दैनिक वेतन भोगी माली का कार्य करता था. शासन के आदेश जिसमें दैनिक वेतन भोगी को ६० एवं ६२ की उम्र में सेवा निवृत्त करने का नया नियम आया उसके अंतर्गत उसे रिटायर कर दिया गया. आज वो मस्जिद के सामने भीख मांगता नजर आता है. जबकि शासन के उसी आदेश में देनिक वेतन भोगी को ग्रेज्युटी देने का भी उल्लेख है. जो दैनिक वेतन भोगी की कुल सेवा के वर्ष में प्रतिवर्ष १५ दिन के वेतन के आधार पर केलकूलेट कर देना चाहिये. यह सुविधा उद्यान विभाग में लागू नहीं है. मध्यप्रदेश शासन के अन्य विभाग जैसे पी.डब्लू.डी. में दैवेभो के रिटायर होने पर दैवेभो को लगभग १.०० लाख से २.५ लाख तक ग्रेज्युटी मिल जाती है. जिससे वह अपनी आगे की जिंदगी कुछ भी धंधा कर गुजार सकता है. शासन तो दैवेभो के लिये कई योजनायें घोषित कर रहा है जिसमें उनका पी.एफ. कटोत्रा, पैंशन स्कीम आदि शामिल हैं परन्तु उद्यान विभाग में अभी तक ये पी.एफ का कटोत्रा भी चालू नहीं हुआ है. २३५ में से १०३ देवेभो ही बचे हैं कुछ परलोक चले गये कुछ अनपढ थे उन्हैं मेडीकल वोर्ड से उम्र का सत्यापन कराकर रिटायर कर दिया गया. परन्तु किसी को रिटायरमेंट के बाद ग्रेज्युटी का लाभ नहीं दिया गया. हां कार्यरत रहते हुये जिनकी मृत्यु हुई उन्हें जरूर १.०० लाख रु दिये गये हैं. जो रिटायरमेंट के बाद जीवित हैं वे भीख मांगने को मजबूर हैं. उच्च पद वालों को रिटायरमेंट के बाद एक या दो वर्ष का एक्सटेंशन मिल जाता है. दै.वे.भो. को वो भी नहीं मिलता.
Wednesday, 17 February 2016
नहीं दी जाती शासकीय अवकाश एवं प्रशूति अवकाश की सुविधा
दैनिक वेतन भोगी भर्ती नियम में उन्हें तीन शासकीय अवकाश के साथ साथ साप्ताहिक अवकाश, ७ दिवस का आकस्मिक अवकाश एवं महिलाऔं को प्रसूति अवकाश की सुविधा दी गई है परन्तु उद्यान विभाग में वर्ष १९८८ के बाद के दैनिक वेतन भोगिऔं को ये सुविधयें देने का प्रावधान नहीं है.
Friday, 25 September 2015
आरती गिरिजा नंदन की
आरती गिरिजा नंदन की, गजानन असुर निकंदन की।
आरती,.....
मुकुट मस्तक पर है न्यारा
हाथ मैं अंकुश है प्यारा,
गले मेँ मौतिन की माला,
उमासुत देवो मेँ आला,
प्रथम सब तुम को नमन करेँ,
सदा सुर नर मुनि ध्यान धरे,
करेँ गुणगान, मिटे अज्ञान, होए कल्याण,
मिले भक्ति भाव भंजन की
आरती गिरिजा नंदन की
आरती गिरिजा नंदन की गजानंद असूर निकंदन की
बालहट पितु से तुम कीनी,
मातु की आज्ञा सिर लीनी,
पूर्ण तुम प्रण अपना कीन्हा,
अंत को मस्तक दे दीना,
सुनत भाई क्रोधित जग माता,
कहा क्या कीन्हा शिवदाता,
कहा है नाथ, पुत्र का माथ, देव मम हाथ,
वरन हो निंदा देवन की,
आरती गरजा नंदन की,
आरती गिरिजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की
चकित भये सुनकर कैलाशी,
करुं जीवित मेँ अविनासी,
गणों से यों बोले वाणी,
शीघ्र ही लाओ कोई प्राणी,
जिसे भी पैदा तुम पाओ,
मनुष्य या पशु हो ले आओ,
तुरंत बन जाए, शीश गज पाय, दिया जुड़वाये,
खुशी की मां ने सुतधन की,
आरती गिरिजा नंदन की
आरती गिरिजा नंदन की, गजानन असुर निकंदन की
हुये गणराजा बलधारी,
बुद्धि विद्या के अवतारी,
सकल कारज मेँ हो सिद्धि,
डुलावे चंवर सदा रिद्दी,
आप हैँ मंगल के स्वामी,
जानते सब अंतर्यामी,
दयालु आप, हरो संताप, क्षमा हो पापा
सुधी अब लीजे भक्तन की
आरती गिरिजा नंदन की
आरती गिरिजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की
आश कीजे पूरन मेरी,
लगाई क्यों तुमने देरी,
दरस देना जी आप गणेश,
मिटाना दुख दारिद्र कलेश,
जगत मेँ रखना मेरी लाज,
विनय भगवती की है गणराज,
मैँ हूँ नादान, मिले सत ज्ञान, देव वरदान,
करुँ सेवानित चरणन की
आरती गिरिजा नंदन की
आरती गिरिजा नंदन की गजानन असुर निकंदन की
शिवा शिव, शिव शिव शिव शिव शिव.....
शिवा शिव, शिव शिव शिव शिव शिव.....
