About Me

भोपाल, मध्‍यप्रदेश, India
लेखक कला के क्षेत्र में सबसे पहले फिल्‍म टंट्या भील में कार्य किया जिसमें होल्‍कर पुलिस का रोल निभाया, इसके बाद फिल्‍म चक्रब्‍यूह में कार्य किया जिसमें ब्‍यूरोकेट का रोल निभाया एवं फिल्‍म सत्‍याग्रह में अनसनकारी का रोल किया जिसमें अमिताभ बच्‍चन के साथ अनसन पर बैठकर रोल किया।

Saturday, 21 February 2015

स्वयंवर

क्या सीता के स्वयंवर के समय जाति बंधन था. यदि कोई भील जाति का आदमी धनूष तोड़ देता तो क्या राजा जनक विवाह करने से मना कर सकते थे. जाति बंधन स्वयंवर पर लागू नहीं होता. आज हम अरेन्ज मैरिज के रूप में झूठी शानोसौकत दिखा कर समाज में बुराई पैदा कर रहे हैं.
दहेज प्रथा, जातिवाद, समाजवाद, आदी भारत में बड़ी समस्या रही हैं. हालांकि अरेंज मैरिज कोई खराब व्यवस्था नहीं है परन्तू अपनी झूठी शान की खातिर लड़के या लड़की की पसंद की शादी में अडंगा डलना भावना को न समझना केवल हम ही सही हैं ऐसा समझना बहूत ही बूरी बात है.
अरेंज मेरिज का पता चलते ही लड़का या लड़की के माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, बूआ-फूफा, मोसा-मोसी सभी रिस्तेदार तैयारी में जूट जाते हैं. सभी सहयोग करने को तैयार रहते हैं किसे क्या गिफ्ट देना है ओर उनके यहां शादी में क्या व्यवहार आया था उसके हिसाब से सभी मदद करते हैं. पर अरैंज मैरिज हमेशा सफल होती हैं ऐसा जरूरी तो नहीं है. और लव मैरिज भी हमेशा सफल हो ऐसा भी कोई दावा नहीं कर सकता है. हां लव मेरिज में ये बूराई जरूर है कि रिस्तेदारों और सगे संबंधियों को ये बहाना मिल जाता है कि उनकी मर्जी से तो शादी की नहीं वे मदद क्यों करें. यदि शादी का डिसीजन लड़का और लड़की ने ही लिया है तो आगे भी सारे डिसीजन उन्हें स्वयं ही लेना पडेंगे.
मैरी स्थिति कूछ ऐसी हो गई जैसी सांप और छछूंदर की होती है जब मूझे मेरी बिटिया जो पेशे से ब्यूटीशियन है, ने अपना डिसीजन सूनाया कि उसे शादी उसकी मर्जी से करना है और किससे करना है उसे उसने देख परख लिया है.
मैंने भी यह बात किसी से छिपाना ठीक नहीं समझा. सारे सगे संबंधियों को बता दी. विरोध तो होना ही था.
पिताजी ने कह दिया कि " देहरी नहीं चढ़ पाओगे"
ससूर साहब ने कह दिया " कूछ भी करना पड़े......ये शादी नहीं हो सकती.." किसी ने भी स्थिति जानने की कोशिस नहीं की.
आज मैं भी लड़की का साथ न दूं तो क्या होगा. वह भाग कर शादी कर ले. तब बदनामी नहीं होगी?
आगे उसके भाईयों की शादी में दिक्कत जरूर आयेगी परन्तू जब तक वे अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे उनकी शादी भी करना आज की स्थिति में ठीक नहीं है. आज मूझे सहारा श्री की वो बात याद आती है..."कोई किसी के लिये कूछ नहीं करता, जो भी करता है, अपने लिये करता है "
समाज मैं महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने का क्या मतलब है यदि हम उनकी भावनाऔं को रौंधते हूए बिना उनकी मर्जी के सारे निर्णय उनपर थोपते रहेंगे.

Thursday, 12 February 2015

नजदीकियां

जितना करीबी जो था, उसपर उतना ऐतवार करते थे.
वफा की जूस्तजू थी उनसे, उन्हीं का दम्भ भरते थे.
मगर जब आफत बड़ी आई, तब हमने था ये जाना.
ईश्वर आकाश में नहीं, ईश्वर तो धरती में बसते थे.
माना की उम्मीद पर ही ये सारी दूनियां कायम है.
उम्मीद पर हर लम्हे का

Sunday, 11 January 2015

गूलाब

शाख से तोड़कर बोतल में लगाने वालों
गर्दनें काटकर पानी तो पिलाने वालों
खूसबूयें और शवाब मैं तूम्हारी महफिल में,
बिखेरता रहूं महफिल को सजाने वालों.

एक माली ने मेरा पूरा खयाल किया,
खाद मिट्टी कीटनाशक का इस्तेमाल किया,
जब में हस्टपूस्ट हूआ और इठलाया,
अपनी महफिल के लिये तूने मूझे हलाल किया.

Sunday, 4 January 2015

व्हाट्सएप के उपयोग मे सावधानियां

व्हॉट्सएप दुनिया की सबसे लोकप्रिय और उपयोगी मोबाइल मैसेज एप्लीकेशन है. लेकिन इसके इस्तेमाल के दौरान एक स्तर पर आप हमेशा इसके साइड इफेक्टस से लड़ते रहते हैं और कई बार यह मशीनी ऐप आपसे जीत जाती है. अब इसकी लत ऐसी है कि छोड़ नहीं सकते, पर कुछ दिक्कतें ऐसी हैं कि मन खिन्न हो जाता है. इसीलिए हम आपके लिए ये खास पांच ट्रिक लेकर आए हैं, जिनकी मदद से आप व्हॉट्सएप का चालाकी से इस्तेमाल कर सकते हैं और उसकी खामियों का शिकार होने से बच सकते हैं. इन तरीकों के बारे में कम लोग जानते हैं. उम्मीद है ये आपके लिए भी मददगार होंगे.

1. लास्ट सीन छुपाने का चोर दरवाजा
आप कुछ लोगों के संदेश ऑफलाइन होकर पढ़ते हैं क्योंकि 'ब्लू टिक' का डर है. इस डर से छुटकारा पाने का एक तरीका है. एंड्रॉयड यूजर इसके लिए 'Hide status' नाम की एप्लीकेशन प्लेस्टोर से डाउनलोड करें. यह ऐप इंस्टॉल करने के बाद आप जब भी व्हॉट्सएप खोलेंगे, आपका वाईफाई और मोबाइल डाटा कनेक्शन अपने आप बंद हो जाएगा. आप जैसे ही व्हॉट्सएप से बाहर आएंगे आपका इंटरनेट दोबारा चलने लगेगा.

2. ग्रुप में कौन कर रहा इग्नोर
ब्लू टिक का कॉन्सेप्ट व्हॉट्सएप ग्रुप में नहीं आया है. अभी यहां सिर्फ सिंगल टिक का ही इंतजाम है. यानी ग्रुप में यह पता नहीं चल पाता कि आपका मैसेज कौन लोग पढ़ चुके हैं और इसके बावजूद इग्नोर कर रहे हैं. तो उसका तरीका व्हॉट्सएप में इनबिल्ट है, पर कम लोग इस बारे में जानते हैं. आप ग्रुप में भेजे गए अपने संदेश को उंगली से प्रेस करके रखें तो वह सलेक्ट हो जाएगा. इसके साथ ही ऊपर की तरफ एक आई बटन (i) दिखाई देगा. इस पर क्लिक कीजिए, आपको पता लग जाएगा कि ग्रुप के कौन से सदस्य आपका संदेश पढ़ चुके हैं और कौन नहीं. इग्नोर करने वालों को पहचानिए और फिर कीजिए टांग खिंचाई. वे भी चौंक जाएंगे.

3. व्हॉट्सएप की तस्वीरें गैलरी में न जाएं
व्हॉट्सएप पर लोग तमाम तरह की फोटोज भेजते हैं, जिनमें बहुत सारी डिलीट करने लायक होती हैं. कई बार उसमें प्राइवेट तस्वीरें भी होती हैं. अगर आप चाहें तो ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि व्हॉट्सएप की तस्वीरें आपके गैलरी के फोल्डर में सेव न हों. एंड्रॉयड यूजर्स को इसके लिए एक व्हॉट्सएप इमेजेस (WhatsApp’s images) या व्हॉट्सएप वीडियो वाले फोल्डर में एक .nomedia फाइल बनानी होगी. इसके लिए आपको एक फाइल एक्सप्लोरर की जरूरत पड़ेगी, मसलन ES File Explorer. इसके अंदर आप इमेजेस या वीडियो के फोल्डर में जाएं. नीचे बाईं तरफ के new बटन पर क्लिक करें, फाइल सेलेक्ट करें और नई फाइल बनाएं, जिसका नाम रखें, .nomedia. इसके बाद व्हॉट्सएप की तस्वीरें आपकी गैलरी में सेव नहीं होंगी.

4. नंबर तो बंद है पर व्हॉट्सएप ऑन है
आप अपना व्हॉट्सएप नंबर किसी भी वक्त बदल सकते हैं. इसके लिए आपको व्हॉट्सएप को डिलीट करके फिर इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं है. व्हॉट्सएप की 'सेटिंग' में जाएं. फिर 'अकाउंट' में और फिर 'चेंज नंबर' में. बस फिर नया नंबर डालकर वेरिफाई करें. याद रखें कि व्हॉट्सएप का नंबर सिर्फ डिस्प्ले का नंबर होता है. बल्कि आप व्हॉट्सएप के लिए एक 'स्विच्ड ऑफ' नंबर का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इस दौर में लड़कियों के लिए यह काम की ट्रिक है. व्हॉट्सएप को आप जिस नंबर से वेरिफाई करें, बाद में उस नंबर को बंद कर दें. एक बार वेरिफिकेशन के बाद व्हॉट्सएप यह नहीं देखता कि नंबर चालू है या नहीं. इसके बाद दूसरे नंबर से अपना नेट चलाएं और व्हॉट्सएप यूज करें. सबको आपका पुराना नंबर ही डिस्प्ले होगा. कोई उस पर कॉल करेगा तो फोन बंद आएगा. यह उन लड़कियों के लिए बेहद उपयोगी है जो वर्चुअल दुनिया के दोस्तों को इतनी जल्दी अपना नंबर नहीं देना चाहतीं, लेकिन व्हॉट्सएप पर बात करने से गुरेज नहीं रखतीं. कोई लड़का नंबर मांगे तो उसे वो स्विच्ड ऑफ वाला नंबर ही बताएं और कुछ दिनों की व्हॉट्सएप चैट से लिफाफे का मजमून भांप लें. 

5. कौन है आपका व्हॉट्सएप फ्रेंड
अगर आपकी आंकड़ों में रुचि है तो यह आपको पसंद आएगा. एक एप्लीकेशन है WhatStat. इसकी मदद से आप व्हॉट्सएप पर अपनी चैटिंग का पूरा हिसाब-किताब देख सकते हैं. मसलन,  यह कि आपके टॉप फ्रेंड्स या टॉप ग्रुप कौन सा है या दिन भर में आप किस वक्त व्हॉट्सएप पर सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं या आपके कितने फीसदी मैसेज अभी डिलीवर होने से बाकी हैं, वगैरह वगैरह.

Saturday, 27 December 2014

हकीकत है जूदा जीवन.....

यहां उलझन में जीबन है,
वहां कांटो पे चलना है,
पडे है पांव मै छाले,
सफर तय फिरभी करना है.

उदासी का सबब तुमको,
बता दुं क्या मेरे यारों,
खडी उस पार है नौका,
मुझे उस पार जाना है.

कठिन है रास्ता लेकिन,
जरा सा हौसला रखना.
तुझे जज्बात रखना है,
मुझे औकात रखना है.

खुदा भी रूठ जाये तो,
फरिशतो साथ देना तुम.
घडी है इम्तिहानों की,
किसी सांचे में ढलना है.

वो पैरहन नहीं है अब,
बदन कैसे छुपाऊं में.
हया रोये अकेले में,
कहां सजना संवरना है.

किताबी ग्यान का कीडा,
लगा कर लोग बैठे है.
हकीकत है जुदा जीबन,
जहां जीना है मरना है.

Monday, 8 December 2014

कर्म प्रधान

नजरिया बदल कर देखो नजारे बदल जायेंगे.
आसमां का सफर करोगे तो सितारे बदल जायेंगे.
जमाना करेगा तरीफ उन्हीं लोगों की.
जिनके कर्मों से जमाने बदल जायेंगे.

कर्म प्रधान विश्व रच राखा, को कर तरक बढ़ावे शाखा.

वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी पर आज हम कर्म क्या कर रहे हैं इससे हमारी जाति पर कोई फर्क नहीं पड़ता है? जाति प्रथा को जिंदा रखने के लिये ही आरक्षण का प्रादूर्भाव हूआ है. आज हम आरक्षण को खत्म करने की बात करते हैं तब हम ये क्यों नहीं सोचते कि जाति को ही खत्म कर दिया जाये. जड़ पर पानी देने से तो पेड़ बड़ा ही होगा. छटाई कब तक करोगे. जड़ ही काट दोगे तो पेड़ अपने आप समाप्त हो जायेगा. पहले हम जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद को खत्म करें फिर समाजवाद लायें उसके बाद विश्व बंधूत्व की बात करें.

Sunday, 7 December 2014

गैस त्रासदी मे मेरा हाल

मैं गैस त्रासदी के समय यूनियन कार्वाईड से १ कि.मी. दूर रहता था. वो एक वगीचा था जिसमें वहूत सारे पेड़ पौधे थे. बड़ा बाग के नाम से जाना जाता है उस जगह को. रात्री में सभी सो चूके थे. में उसी दिन गांव से आया था पापा के साथ. पापा मूझे यहां छोड़कर छिंदवाड़ा की बस पकड़कर रवाना हूये थे. रात को मीर्ची जलने की महक से खांसी चालू हूई तो रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी. मैं पड़ोसी से लड़ रहा था यह समझकर कि उन्होंने सब्जी के तड़के में मिर्ची जला दी है. पर वो मूझपर ही आरोप मढ़ रहे थे. पर जब रोड पर लोगों के भागने की और चिल्लाने की आबाज आई "भागो भागो गैस निकल गई है, इस दौरान खांसी बंद होने का नाम नहीं ले रही थी. किसी ने कहा बाहर नहीं निकलो और कोई कह रहा था बाहर निकल कर भागो. मैं बाहर िनकला तो खांसी में राहत मिली सो मैं हमीदिया हास्पिटल की ओर चल दिया खांसते हूये चला जा रहा था सूबह के ०४.०० बजे थे अंधेरे में आबाजें आ रहीं थी लोग भाग रहे थे कूछ रोड पर निढाल होकर पड़े थे कूछ मदद के लिये हाथ बढा रहे थे पर सब अपनी जांन बचा कर भाग रहे थे. किसी तरह अस्पताल पहूंचे. वहां पर गैस का असर कम था क्योंकि अस्पताल ऊंचाई पर था. गैस भारी थी निचे की ओर भरा रही थी हबा से बजनी होने के कारण. किसी तरह सूबह होने पर प्राथमिक उपचार किया गया. पापा जैसै ही सूवह बस से छिंदवाड़ा उतरे खबर लगते ही बापस भोपाल के लिये बस में वैठ गये. आसंका से घिरे हूये कि पता नहीं क्या हूआ होगा. उस समय मोबाईल भी नहीं हूआ करते थे. कि खबर हो जाती. जब घर पर पहूंचे और सही सलामत देखा तो जान मैं जान आई.

पापा कहते हैं

पापा कहते हैें....
दूनियां बहूत खराब है..
सीधे स्कूल जाऔ और घर आऔ..
किसी से रास्ते में बात मत करना..
लड़कों से दूर रहना...

Thursday, 2 October 2014

खिड़कियां

ये पेड़ों के झुरमुट,
ये चिड़ियों का जमघट,
ये फूलों का खिलना,
दिखाती हैं खिड़कियाँ.

ये वाहनों का जाना,
दुकानों का खुलना,
पैदल भरी सड़क पर चलना
दिखाती हैं खिड़कियाँ.

कभी बादल घनेरे,
कभी बूंदों की रिमझिम,
कभी तारों की टिम टिम,
दिखाती हैं खिड़कियाँ.

सुबह सूरज के दर्शन,
रात्रि चंदा की जगमग,
पत्तों का झड़ना,
दिखाती हैं खिड़कियाँ .

दूर पहाड़ों के उन्नयन,
ये झीलों की लहरें,
वायुयानों की गर्जन,
दिखाती हैं खिड़कियाँ

जब हम हों घर में अकेले,
तन निर्बल और मन हो सशंकित,
बहार की दुनियां,
दिखाती हैं खिड़कियाँ .

ये हवा के झोंके,
ये पर्दे का हिलना,
हवा के रंगों को,
दिखाती हैं खिड़कियाँ


Wednesday, 17 September 2014

गुबार रह गया बाकी.....

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

मैंने चाहा था जो, वो सब दिया उसने,
फिर भी उसपर मेरा कुछ उधार रह गया बाकी.......

उसको पाने की तमन्ना थी, पाया भी
पर नजदीकियों का एक खुमार रह गया बाकी........

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

घर तोड़ दिया लोग लेगये ईंटें
अब तो उस जगह प्लाट रह गया बाकी......

खाली जगह देख करलोगों  ने बना दी धर्मशाला
आशियां बनाने का इंतजार रह गया बाकी........

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

दर्द छिपा सकते थे, छिपा लिया हमने
जो न छिप सका, वो बुखार रह गया बाकी.......

मेरे मुर्दे ने भी अपनी आंखें खुली रख्खी,
लगता है तेरा इन्तजार रह गया बाकी......

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

बूजूर्गों का रहमो करम पहले भी था आज भी है,
बस बच्चों द्वारा आदर सत्कार रह गया बाकी.......

बच्चों को तो हमने खूब पढ़ाया लिखाया,
बस देना था जो संस्कार रह गया बाकी......

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

बच्चों की पढ़ाई, बिटिया की शादी मैं ही जानता हूं कैसे की,
अब तो अंतिम संस्कार रह गया बाकी......

आपरेशन के दौरान किडनी चूरा ली,
क्या डॉक्टरों का यही व्यापार रह गया बाकी....

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

अस्पताल में बच्चा कैसे बदल गया,
अब क्या यही कारोवार रह गया बाकी....

बाप ने लूट ली बेटी की अस्मत,
अब न अपनों पर ऎतवार रह गया बाकी......

दिल में बस इतना सा गुबार रह गया बाकी
प्यार दोनों ही तरफ था इजहार रह गया बाकी.......

दिनेश दुबे
9229547354 


Tuesday, 15 July 2014

इस्क की इन्तेहां

तू सोख नजर के तीर चला, कि दिल का कीमा बन जाए.
कीमे से तू जा चींटी को चुगा, कि हुस्न तेरा न ढल जाए.

Sunday, 15 June 2014

पिता है वो.......

वट वृक्ष है वो जिसकी जड़ें आफिस दुकान खेत खलिहान तक फैली हैं
रहते हैं इसकी छांव में
कोई भय त्रास नहीं रहता
इसकी जडें हैं बहूत फैली
खीच ही लातीं हैं रस
जो देता है सरणागत् को पनाह
पतझड़ में झड़ जाते हैं पत्ते
फिर भी उस समय की मार को झेलकर
करता है
फिर तैयारी
वही छांव देने की
नई कोमल पत्तियां लाकर
पिता है वो ………………………………… . 

Saturday, 5 April 2014

एक पिता का ईश्वर से अनुनय, बेटी को केंसर है लास्ट स्टेज पर है


भगवान् क्यों
क्यों मेरी बेटी के साथ इतना बड़ा खेल खेल रहे हो,
आखिर क्या गुनाह किया है उसने जो उसे इतनी बड़ी सजा दे रहे हो,
हर रोज तुम्हारी पूजा करती है
क्या यह गुनाह है
सारी दुनियां आपके आगे झुकती है
तो आपको क्या फर्क पड़ता है उसमे से एक कम हो गया तो,
आप तो सारे संसार के पिता हैं
पर मैं क्या करूँ मेरी तो एक ही बेटी है ना
सारे संसार के पिता हो
कभी एक बेटी के पिता बनकर देखो कितनी तकलीफ होती है
तीन साल की थी मेरी पायल तब तुमने उससे उसकी माँ को छीन लिया
तब मैं खामोश रहा
रात रात भर इन्हीं हाथों का झूला बनाकर, लोरी गाकर उसे सुलाया है,



मत करो भगवान् ऐसा मत करो
यदि जान ही लेनी है तो मेरी ले लो
मगर कोई भी बेटी का बाप अपनी बच्ची को मरते हुए नहीं देख सकता,
भगवान, नहीं देख सकता

Sunday, 15 January 2012

फूट डालो और शासन करो नीति

फूट डालो और शासन करो नीति
अपनाई थी
अंग्रेजों ने
हमने भी कौन सा तीर मार लिया
वही नीति
अपनाते है।
बना कर गये जो कानून
वही कानून
चलाते हैं
उन कानून में बदला तो वही
पसर्नल लॉ
फूट डालो और शासन करो
जो हमें स्वतंत्रता की लडाई के समय याद आया था
कि हमें जाति-पांति को
त्यागकर
एक होना है।
भूल गये है हम
जाति, धर्म, भाषा, वर्ण
ये हथियार
बन गये हैं
नेताओं के
करते है वार आरक्षण का ,
बनाओ ढाल एकता की
न बना सके वेवकूफ
न बांट सके छोटे-छोटे समूहों मैं
बोट बैंक की तरह
न खुले हों जगह जगह
अलग अलग नाम के बैंक
बैंक एक हो अपना
खाते खोलना हमारे हाथ में होता है।
नहीं खोलें हम खाते उनके
जो चुनाव के समय आते हैं
हमारे घर पर
हम खोलते हैं उनका
खाता
तभी खुलता है उनका खाता
स्विस बैंक में।

दिनेश दुबे
9229547354